Saturday, February 19, 2011

Updesh Manjari


उपदेश मंजरी
दुःख तो इस बात का है हरीश  इस संसार में भक्त कहलाने वाले लोग तो बहुत है, लेकिन दुसरे का दर्द नहीं समझते है! दुकान पर बैठ गए है, तो ठगने से पीछे नहीं हटेगे, अगर ज्ञानी है, तो ज्ञान से ठग रहे है, धनी है तो अपने धन के माध्यम से ठग रहे है! यदि उचे पद पर बैठे हुए है, तो अपने रौब से ठग रहें है, किसी न किसी तरह से यह ठगी, निर्दयिता चल रही है! मंदिर में जाते है, तो माथा झुकाने में पीछे नहीं, लेकिन ठगने में भी पीछे नहीं! संतों ने इसलिए तो कहा है हरीश अगर तू भक्त बनता है, तो पूरा भक्त बन और ठग भी बनता है, तो पूरा ठग तो बन, दुनिया को अत तो लगे, की तू आदमी ठग है, तू दूसरों का मुखौटा क्यों पहनता  है!
Harish

Monday, February 14, 2011

Kabhi to Subah Hoga


वो सुबह कभी तो आयेगी,
इन कली सदियों के सर से,
जब रात का आँचल ढलेगा,
जब अम्बर झूम के नाचेगा,
जब धरती नभ में गाएगी,
वो सुबह कभितो आयेगी,
Harish 

Wednesday, February 9, 2011

Tips Shayari

जीभ में लगा घाव तो पुज जाता है 
लेकिन जीभ से लगा घाव कभी भी नहीं पुजता है 
चल गया तो पैसा ही पैसा 
अगर नहीं चला तो पहले जैसा

Wednesday, February 2, 2011

हरीश
प्यार का तौफा दोस्त करना प्रेम कबूल
याद रखना इस २०११ को कभी ना जाना भूल
 जिंदिगी तनहा 
दिन गुजरता नहीं है लोगों में 
रात होती नहीं हा बस तनहा 
हमने दरवाजे तक तो देखा था 
फिर ना जाने कोई किधर तनहा 
काफिला साथ और सफ़र तनहा 
जिन्दगी हुई बसर तनहा

हरीश विश्वकर्मा